माँ-बाप का असीम त्याग और बेटे का समर्पण

माँ-बाप का असीम त्याग और बेटे का समर्पण ❤️

माता-पिता का स्थान इस दुनिया में ईश्वर से भी बढ़कर है। वे खुद अनगिनत कष्ट सहते हैं, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ते। Param World के इस विशेष लेख में, प्रस्तुत है एक ऐसी भावुक कविता जो माता-पिता के संघर्ष, उनकी उम्मीदों और एक बेटे के जीवन की वास्तविकता को बयां करती है। यह कविता आपको जीवन के असली मूल्यों से रूबरू कराएगी।

मैं ही तो उनका एक सहारा हूँ

॥ मैं ही तो उनका एक सहारा हूँ ॥

माँ-बाप की आँखों का तारा हूँ !
मैं ही तो उनका एकमात्र सहारा हूँ !!
मुझसे ही उनका हर एक सवेरा है !
मेरे माँगने से पहले कहते हैं बेटा सब कुछ तेरा है !!

घर में कुछ नहीं रहता है खाने को !
चुन-चुन कर लाते हैं मेरे लिये खाने को !!
खुद तो शिक्षा से बहुत दूर थे !
पर मुझे कभी किताबों से दूर होने नहीं दिया !!

रोज मजदूरी करके लाये एक-एक पैसे !
और हर एक पैसा मुझ पर लुटा दिये !!
ये जीवन उनके कठिन परिश्रम से पाया हूँ !
मैं ही तो उनका एकमात्र सहारा हूँ !!

भेज दिये मुझे पढ़ने अकेले पाने को मंजिल ऊँची !
करते थे इकट्ठा एक-एक पैसा खाके रूखी-सूखी !!
सुबह से लेकर शाम तक करते थे मजदूरी !
हर वक्त यही सोचते कि हमारा लाडला करेगा आस पूरी !!

बाहर जाके मस्त हो गया दोस्ती-यारी में !
वाह रे परम, भाग रहा था अपनी जवाबदारी से !!
कुछ समय बाद आया मेरे समझ में !
व्यर्थ गँवा रहा था अपना अमूल्य जीवन इस जग में  ! !

✍️ रचनाकार: परम साहू

संस्थापक - Param World
(डिजिटल क्रिएटर एवं वेब डेवलपर)

"अगर आपको यह कविता पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें।"