भारत माता के दुलौरीन बेटी, मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे ।
जेकर गोदी म हे पर्वत पठार, अऊ नदिया नरवा के धारी हे ।।
शिवनाथ ह गोद म बैठे, इंद्रावती के पहरेदारी हे ।
महानदी हरे मया के चिन्हा, अऊ अरपा पैरी संगवारी हे ।।
मैनपाट मुकुट (मऊर) बरोबर, मटासी होट के लाली हे ।
बदरगढ़ अऊ चावरढाल ह, सूघघर कान के बाली हे।।
नथुनी सोहे छाता पहाड़, गला म सिहावा अऊ फुल्हारी हे ।
केशकाल तक केश ह झूले , करधनिया रावघाट के पहाड़ी हे ।।
बस्तर सुघघर हरियर के लुगरा, सरगुजा के पोलखा सुहावत हे ।
दुरुग बिलासपुर रायपुर के अचरा , देखे म बड़ मन भावत हे ।।
जंगल झाड़ी अऊ पहाड़ी , मोर महतारी के श्रृंगार हरय ।
धान के कटोरा म बोरे बासी, ठेठरी खुरमी ह फरहार हरय।।
बड़ गुत्तूर भाखा छत्तीसगढ़ी, पहाड़ी मैना वन भैसा ह चिन्हारी हे ।
भारत माता के दुलौरीन बेटी, मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे।।
मैनपाट हे माथा के बिंदी , सूरजपुर सिंदूरी हे ।
गरियाबंद सोहे गला के गहना, बेमेतरा हाथ भर चूरी हे।।
चित्रकोट तोर चरन पखारे, तीरथगढ़ सेवादारी हे ।
भारत माता के दुलौरीन बेटी , मोर छत्तिसगढ़ महतारी हे।।

