छत्तीसगढ़ महतारी पूरा परिचय एक कविता में

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छत्तीसगढ़ महतारी

छत्तीसगढ़ महतारी                      

भारत माता के दुलौरीन बेटी, मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे ।

जेकर गोदी म हे पर्वत पठार, अऊ नदिया नरवा के धारी हे ।।

शिवनाथ ह गोद म बैठे, इंद्रावती के पहरेदारी हे ।

महानदी हरे मया के चिन्हा, अऊ अरपा पैरी संगवारी हे ।।

मैनपाट मुकुट (मऊर) बरोबर, मटासी होट के लाली हे ।

बदरगढ़ अऊ चावरढाल ह, सूघघर कान के बाली हे।।

नथुनी सोहे छाता पहाड़, गला म सिहावा अऊ फुल्हारी हे ।

केशकाल तक केश ह झूले , करधनिया रावघाट के पहाड़ी हे ।।

बस्तर सुघघर हरियर के लुगरा, सरगुजा के पोलखा सुहावत हे ।

दुरुग बिलासपुर रायपुर के अचरा , देखे म बड़ मन भावत हे ।।

जंगल झाड़ी अऊ पहाड़ी , मोर महतारी के श्रृंगार हरय ।

धान के कटोरा म बोरे बासी, ठेठरी खुरमी ह फरहार हरय।।

बड़ गुत्तूर भाखा छत्तीसगढ़ी, पहाड़ी मैना वन भैसा ह चिन्हारी हे ।

भारत माता के दुलौरीन बेटी, मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे।।

मैनपाट हे माथा के बिंदी , सूरजपुर सिंदूरी हे ।

गरियाबंद सोहे गला के गहना, बेमेतरा हाथ भर चूरी हे।।

चित्रकोट तोर चरन पखारे, तीरथगढ़ सेवादारी हे ।

भारत माता के दुलौरीन बेटी , मोर छत्तिसगढ़ महतारी हे।।

__________दीक्षित वर्मा _________

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