ऐ मुसाफिर यूँ हारकर ना बैठ तेरा दिन भी आयेगा....

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ऐ मुसाफिर यूँ हारकर ना बैठ, तेरा दिन भी आयेगा |
लगे रहो लगातार, एक दिन सफलता भी टकराएगा ||
यूँ दो दिन की मेहनत से, ज़िन्दगी में रंग ना भर पायेगा |
थक हार के बैठे जाओगे तो, किया हुआ मेहनत भी बेकार जायेगा ||
ऐ मुसाफिर यूँ हारकर ना बैठ
तेरा दिन भी आयेगा
तेरा दिन भी आयेगा ||
सहज नहीं होता , किसी पथ पर चलना |
कांटे भी चुभ जाये तो, सिख लो दर्द सहना ||
बिना थके , बिना रुके ,
लक्ष्य को साधे, अडीग पथ पर चलते रहो ! 
देख तेरा खून पसीना, अम्बर भी धरती पर आयेगा ! 
ऐ मुसाफिर यूँ हारकर ना बैठ
तेरा दिन भी आयेगा
तेरा दिन भी आयेगा ||
...............परम साहू ................

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